लोगो के करोडो रुपये लेकर घूम रहे थे सिंगापुर, जयपुर से पुलिस ने पकड़ा

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ब्यूरोचीफ, दिलीप लालवानी (फिरोजाबाद) :- नगर के सैकड़ों लोगों के करोड़ों रुपए लेकर फरार हुए ड्राफ्ट वाली भाभी को पुलिस ने जयपुर में पकड़ लिया। दोनों आठ माह से जयपुर में रह रहे थे। शनिवार को पुलिस दोनों को फिरोजाबाद ले आई। एसपी सिटी राजेश कुमार सिंह व एसएसपी सचिंद्र पटेल ने बताया कि शहर के प्रमुख कारोबारी प्रदीप गर्ग व उसकी पत्नी मंजू गर्ग प्रॉपर्टी डीलिंग, बिल्डिंग मैटेरियल और बीसी का कारोबार करते थे। शहर के सैकड़ों कारोबारियों ने उनके साथ कारोबार में पैसा लगा रखा था। महिला कारोबारी के पास गिरफ्तारी पर रोक का हाईकोर्ट का आदेश था, इसलिए उसे छोड़ दिया। पति-पत्नी दोनों पर पुलिस ने गैंगस्टर लगाने के साथ साथ 25-25 हजार रुपए का इनाम भी घोषित किया था। कारोबारियों के करोड़ों रुपए लेकर मंजू गर्ग और प्रदीप गर्ग शहर छोड़ कर भाग गए। थाना दक्षिण की ओम बिला निवासी नीता गुप्ता ने थाना उत्तर में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसके बाद थाना दक्षिण में पंकज अग्रवाल और अशोक माहेश्वरी ने रिपोर्ट दर्ज कराई।एसपी सिटी राजेश कुमार सिंह और सीओ टूंडला संजय वर्मा के नेतृत्व में पुलिस ने शनिवार को राजस्थान के जयपुर स्थित पल्स ग्रीम एकड़ श्री गोपालपुरा थाना महेशनगर स्थित एक सोसाइटी से दोनों को गिरफ्तार कर लिया। मंजू गर्ग की गिरफ्तारी पर हाईकोर्ट का स्टे होने के कारण उन्हें छोड़ दिया। आरोपी प्रदीप गर्ग को जेल भेजा है। पुलिस सूत्रों के अनुसार दोनों की लोकेशन कुछ दिनों पूर्व सिंगापुर में मिल रही थी। करोड़ों के खेल में महिला कारोबारी का नंबर दो का कारोबार पूरे कांच और चूड़ी उद्योग में फैला था। महिला कारोबारी मंजू गर्ग को लोग उनके असली नाम से कम, बल्कि भाभी के नाम से जनते हैं। इस महिला कारोबारी की इतनी धाक और धमक थी कि उनके हस्ताक्षर का चेक कांच और चूड़ी कारोबारियों के बीच करेंसी के रूप में घूमता था। लाखों रुपये की बीसी और सिक्का का करोड़ों का कारोबार उन्होंने शहर के करीब 1500 लोगों के बीच फैला रखा था। उनके पति प्रदीप गर्ग केमिकल का काम रहते थे, लेकिन ड्राफ्ट, चेक, रीयल एस्टेट के करोड़ों के कारोबार को मंजू गर्ग उर्फ भाभी ही संभाले हुए थी। यह विदेश में सैर-सपाटा, महंगे शौक, चकाचौंध वाली जिंदगी जीने के शौकीन थे। करोड़ों रुपये के बीसी, सिक्का और पर्ची के खेल में महिला कारोबारी से करीब डेढ़ हजार लोग जुडे़ थे। इनमें डाक्टर, उद्योगपति, चूड़ी कारोबारी, प्लांट चलाने वाले और मध्य वर्ग व्यापारी भी शामिल थे। जानकारों के अनुसार महिला कारोबारी के यहां करोड़ों रुपये की बीसी डाली जाती थी। तीन हजार रुपये प्रतिमाह का सिक्का (कार्ड) चलता था। इस कार्ड के खेल में सैकड़ों लोगों ने पैसा लगा रखा था। काले धन के कारोबार में शहर के तमाम ऐसे बडे़ लोग जिन पर ब्लैक मनी थी, उन्होंने महिला कारोबारी पर विश्वास करके यह पैसा तीन से चार प्रतिशत की ब्याज पर महिला कारोबारी को दे रखा था। एक-एक कारोबारी ने दस लाख रुपये से लेकर तीन करोड़ रुपये तक ब्याज पर दे रखे थे और ब्याज के पैसे पर ऐश हो रही थी। सिक्का के नाम से चलने वाले तीन हजार रुपये के कार्ड के खेल में पांच सौ लोग शामिल थे। इस तरह के कार्ड सिस्टम वाले कई योजनाएं महिला कारोबारी चला रही थी। तीन हजार रुपये का कार्ड लेने वाला सदस्य बनता था। पांच सौ सदस्य हर माह तीन-तीन हजार रुपये देते। कारोबारियों के अनुसार दस लाख रुपये से कम की बीसी (कमेटी) महिला कारोबारी के यहां नहीं डाली जाती थी। दस लाख रुपये से एक करोड़ रुपये की बीसी डाली जा रही थी। जानकार बताते हैं कि महिला कारोबारी के यहां करीब 120 बीसी चल रही थीं और करीब पांच बीसी का प्रतिदिन ड्रा होता था।

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