शनि अमावस्या: आज किया गया दान-पुण्य देता है चार गुना फल

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शनि के वक्र काल में व्यक्ति को संतोष, विवेक व धैर्य का सहारा लेना उपयोगी रहता है ताकि किसी विपरीत परिस्थिति का सामना न करना पड़े। जिनकी कुंडली में शनि अशुभ हों, दशा-अंतर्दशा व साढ़ेसाती-ढैया चल रही हो, वे व्यक्ति शनि शांति के विभिन्न उपायों को अपनाएं। शनि कुंडली में त्रिक 6,8,12 भावों का कारक है। वृष, तुला, मकर और कुंभ लग्र वालों के लिए शनि शुभ फलदायक होते हैं। किसी भी जातक की कुंडली में शनि की स्थिति जातक के पिछले जन्मों के कर्मफल के अनुसार ही होती है। कुंडली में शनि नीच, अस्त अथवा पीड़ित होने पर कष्टकारी होते हैं। ज्योतिष विद्वानों का मानना है कि इस रोज आस्था और श्रद्धा भाव से किया गया दान पुण्य चार गुना फल देता है।

असहाय व्यक्तियों की सेवा करने से, भैरव उपासना और शनैश्चरी अमावस्या के दिन गरीबों को अन्नदान करने से शनि की कृपा प्राप्त होती है।

पीपल की जड़ में जल चढ़ाएं तथा सायं को सरसों के तेल का दीपक जलाएं।

हनुमान जी के निमित्त मंगलवार को व्रत रखें। हनुमान चालीसा, शनि स्तोत्र का पाठ करें। शनि की वस्तुओं का दान करें।

काले घोड़े की नाल घर या दुकान में लगाएं, पारद शिवलिंग, पुरुषाकार शनि यंत्र की स्थापना करें।

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